अहमदाबाद: रूस की ओर से यूक्रेन में जंग छिडऩे का न सिर्फ गुजरात बल्कि देश के कारोबार पर भी पडऩे की आशंका है। यदि यह युद्ध लम्बा खींचता है तो इसका असर गुजरात में मोरबी के सिरेमिक उद्योग पर भी पड़ सकता है।

केन्द्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के तहत कैपेक्सिल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट निलेश राणपरिया ने बताया कि मोरबी के टाइल्स का रूस में बड़ा बाजार है। युद्ध के चलते निर्यात पर असर पड़ सकता है। वहीं गैस के भाव भी बढ़ सकते हैं। अगले महीने रूस में टाइल्स इंडस्ट्री से जुड़ी एक प्रदर्शनी प्रस्तावित थी लेकिन लगता युद्ध के चलते इसका आयोजन नहीं हो सकेगा।
सिरेमिक टाइल्स उत्पादन का हब है मोरबी
गुजरात का मोरबी देश भर में सिरेमिक टाइल्स उत्पादन का हब माना जाता है। यहां 70 से 80 फीसदी से ज्यादा टाइल्स और सेनेटरी उत्पाद बनाए जाते हैं। मोरबी में करीब एक हजार इकाइयां हैं, जिसमें चार सौ से ज्यादा ऐसी इकाइयां हैं जो खाड़ी देशों में अपने उत्पाद निर्यात करती हैं। इसके अलावा ज्यादातर इकाइयां यूक्रेन से लगती पूर्वी यूरोपीय देशों-पोलैण्ड, हंगरी, आस्ट्रिया, स्लोवाकिया के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों को निर्यात की जाती है। इस उद्योग के जरिए चार लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।
अब राजस्थान से आता है कच्चा माल
सिरेमिक प्रोडक्टस बनाने के लिए 70 फीसदी कच्चा माल राजस्थान के राजसमंद समेत अलग-अलग जिलों से मंगाई जाती है। इनमें मिनरल पाउडर, मार्बल स्लरी, चाइना क्ले व चीनी मिट्टी शामिल है। साथ ही यूक्रेन से भी मोरबी के सिरेमिक उत्पाद बनाने के लिए चिकनी मिट्टी मंगाई जाती है, जो मुलायम और चमकदार होती है। इस मिट्टी से बनने वाली टाइल्स आकर्षक और चमकदार होती हैं।

