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जयपुर / राजस्थान में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ सुप्रीम कोर्ट ने परिसीमन चुनौती खारिज की, मार्च के पहले हफ्ते में हो सकती है तारीखों की घोषणा

राजस्थान में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ सुप्रीम कोर्ट ने परिसीमन चुनौती खारिज की, मार्च के पहले हफ्ते में हो सकती है तारीखों की घोषणा
Rajsamand today February 18, 2026 09:39 PM IST

जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है। Supreme Court of India ने पंचायत परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद राज्य में पंचायत चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

याचिका में नए वार्डों के गठन, आरक्षण व्यवस्था और सीमांकन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई थी। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार की परिसीमन प्रक्रिया को वैध ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद अब चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी अड़चन शेष नहीं रही है।


मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम संभव

सूत्रों के अनुसार, Rajasthan State Election Commission मार्च के पहले सप्ताह में पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

बताया जा रहा है कि इस बार आचार संहिता लगभग 30 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान नई सरकारी योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास, भूमिपूजन और तबादलों जैसे प्रशासनिक निर्णयों पर प्रतिबंध रहेगा।


अप्रैल मध्य तक पूरी हो सकती है चुनाव प्रक्रिया

प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार, पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया अप्रैल मध्य तक संपन्न कराई जा सकती है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी, मतदान और मतगणना की तिथियां तय की जाएंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों ने अभी से जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। गांव-गांव बैठकों और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है।


लोकतंत्र की बुनियाद हैं पंचायत चुनाव

पंचायत चुनाव ग्रामीण स्वशासन की नींव माने जाते हैं। सरपंच, वार्ड पंच, प्रधान और जिला प्रमुख जैसे जनप्रतिनिधि गांवों में विकास कार्यों की दिशा तय करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई जनप्रतिनिधि संस्थाएं तय समय में गठित हो सकेंगी।

राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की नजर अब चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है। प्रदेश भर में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही हैं।

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