ग्राइंडिंग यूनिटों में ग्रीन बेल्ट नियम की पालना नहीं
13 वर्ष पहले
पेड़ पौधों के अभाव में काम करने वालों के लिए खतरा
उदयपुर. राजस्थान सरकार एक ओर पर्यावरण को हरा भरा व प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए ग्रीन बेल्ट के नियम की बात पूर जोर से करती रही है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट का नियम औपचारिक दिखाई देता है। इस दिशा में सामान्य नियमोंं को ईमानदारी से न तो कारखाना संचालक लागू कर रहे है न ही संबंधित विभाग इस दिशा में सकारात्मक कदम उठा पाया है।
ग्राइंडिंग वाली यूनिट के आसपास के क्षेत्र का तो भगवान ही मालिक है। यहां डस्ट से होने वाली बीमारियों से इंकार नहीं किया जा सकता। मजे की बात तो यह है कि प्रदूषण मंडल के आसपास ही ग्राइंडिंग वाली यूनिटों में नियमों की पालना नहीं हो रही है। ऐसे में दूर क्षेत्र में नियमो की धज्जियां किस प्रकार उड़ रही है यह किसी से छिपा नहीं है।
33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट नाम का : मादड़ी औद्योगिक क्षेत्र हो या कलड़वास या सुखेर का क्षेत्र को देखने से यह साफ जाहिर होता है कि औद्योगिक इकाई को संचालन करने के लिए 33 प्रतिशत भू भाग पर ग्रीन बेल्ट होना आवश्यक है लेकिन इस दिशा में ईमानदारी नहीं बरती जा रही है। एक दो या नाम के पांच दस पौधे लगाकर औद्योगिक इकाइयां यह साबित करने लगी है कि वे सरकार के नियमों की पालना कर रही है।
मुंह चिढ़ाती इकाइयां : उदयपुर का प्रमुख मादड़ी औद्योगिक क्षेत्र जहां यूसीसीआई, प्रदूषण नियंत्रण मंडल ,रीको व डीआईसी कार्यालय से महज कुछ दूरी पर संचालित औद्योगिक इकाइयों में ही पौधरोपण के नाम पर बेमानी साफ दिखाई देती है। वहीं कई सोपस्टोन की इकाइयां बिना शेड ही संचालित है। ऐसे में आसपास के क्षेत्रों में सफेद धूल की चादर जगह जगह फैली दिखाई देना आम बात है।
जिले में 250 इकाइयां : मंडल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 250 से अधिक मिनरल ग्राइंडिंग इकाइयां है। इसके अलावा मार्बल कटिंग एवं पॉलिशिंग की करीब 300 इकाइयां है। उदयपुर संभाग में मार्बल कटिंग एवं पॉलिशिंग की सर्वाधिक इकाइयां सुखेर एवं राजनगर क्षेत्र में है।
अब जयपुर से स्वीकृति : लाल श्रेणी में आने से अब ग्राइंडिंग इकाइयों के संचालन और स्थापना के लिए मंडल के जयपुर मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। अब मंडल द्वारा अधिकतम तीन वर्ष और न्यूनतम एक वर्ष की एनओसी मिल पाएगी। पहले 15 साल तक इनके प्रदूषण की जांच नहीं होती थी।
यह है नियम : जल अधिनियम 1974 व वायु अधिनियम 1981 के तहत किसी भी औद्योगिक इकाई के संचालन के लिए अनुमति जारी करने की महत्वपूर्ण शर्त औद्योगिक इकाई क्षेत्र में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट होना आवश्यक है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उद्यमी वैज्ञानिक तरीके से इकाई सीमा क्षेत्र में पौधरोपण करें ताकि अन्य लोगों को उत्पादन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
क्या कहते हैं चिकित्सक : महाराणा भूपाल चिकित्सालय में मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वाई एन वर्मा का कहना हैं कि जहां ग्राइंडिंग यूनिट खुले में संचालित है वहां हवा में डस्ट वहां के श्रमिकों को ही नहीं आसपास रहने वाले लोगों को भी प्रभावित करती है। सोपस्टोन की पिसाई के दौरान सावधानी नहीं बरतने पर लंग्स की बीमारी होना आम है।

