राजसमंद। जिले की खमनोर तहसील के बड़ा भानुजा गांव में आयोजित दो दिवसीय पालीवाल ब्राह्मण समाज के अखिल भारतीय महासम्मेलन में रविवार को आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 800 वर्षों बाद ऐसा ऐतिहासिक अवसर आया, जब भगवान श्रीकृष्ण के छह विग्रह स्वरूप एक ही गांव में एकत्रित हुए। इस दिव्य मिलन के साक्षी बनने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु बड़ा भानुजा पहुंचे, जिससे कस्बे की मुख्य सड़कें देर तक जाम रहीं।
महासम्मेलन के मुख्य आयोजक चंद्रशेखर पुरोहित ने बताया कि लगभग आठ शताब्दियों पूर्व समाज के पूर्वजों द्वारा ऐसा भव्य आयोजन किया गया था। उसके बाद पहली बार इस स्तर पर ठाकुर जी के विग्रहों का ऐतिहासिक संगम हुआ है।
बस स्टैंड से निकली भव्य शाही सवारी
बड़ा भानुजा बस स्टैंड से सभी विग्रहों का पारंपरिक स्वागत किया गया। इसके पश्चात हाथी, घोड़े, डीजे और स्वर्ण-रजत वेवाण के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालु भजनों की धुन पर नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे दिखाई दिए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
शोभायात्रा में बड़ा भानुजा के लक्ष्मी नारायण मंदिर बड़ा भानुजा के भगवान लक्ष्मी नारायण, खमनोर के चारभुजानाथ मंदिर खमनोर, चिकलवास के चारभुजानाथ मंदिर चिकलवास, गवारडी के लक्ष्मीनारायण मंदिर गवारडी, चंदेसरा खेड़ा के द्वारकाधीश मंदिर चंदेसरा खेड़ा तथा सेंमटाल के चारभुजा नाथ मंदिर सेंमटाल से पधारे ठाकुर जी के विग्रह विराजमान रहे।
लक्ष्मी नारायण मंदिर में महाआरती
भव्य शोभायात्रा के बाद सभी विग्रहों को ससम्मान लक्ष्मी नारायण मंदिर में विराजित किया गया, जहां लाखों भक्तों ने सामूहिक महाआरती में भाग लिया। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का दुर्लभ और पुण्य अवसर बताया।
प्रशासन व समाजजनों का सहयोग
आयोजन को सफल बनाने में व्यवस्था समिति, समाजजनों और आसपास के ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया।
महासम्मेलन के दूसरे दिन विधि-विधान से ठाकुर जी के विग्रहों को विदाई दी जाएगी।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल पालीवाल समाज की एकजुटता का संदेश दिया, बल्कि राजसमंद की धरती को भी भक्ति और सांस्कृतिक गौरव के रंग में रंग दिया।

