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राजसमन्द / भगवान राम की कथा सुनने तथा उसे आत्मसात करने के बाद व्यक्ति के मन से हर प्रकार की शंका स्वतः ही दूर हो जाती है:संत मुरलीधर जी महाराज

भगवान राम की कथा सुनने तथा उसे आत्मसात करने के बाद व्यक्ति के मन से हर प्रकार की शंका स्वतः ही दूर हो जाती है:संत  मुरलीधर जी महाराज
Rajsamand today April 06, 2022 06:47 PM IST

चैत्र नवरात्र के उपलक्ष्य में क्षेत्र के आगरिया की वाड़ा गांव में वैष्णव परिवार व समस्त ग्रामवासी आगरीया व आगरीया की वाड़ा  की मेजबानी में संत  मुरलीधर  महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के बुधवार को पंचम दिवस में कथावाचक संत  मुरलीधर जी महाराज ने श्रीरामचरितमानस के बालकांड में वर्णित सीता स्वयंवर प्रसंग के तहत पुष्प वाटिका प्रसंग,जगत जननी मां सीता द्वारा गौरी पूजन, भगवान राम कि अलोकिक छवी  व लक्ष्मण के जनकपुर नगर भ्रमण का प्रसंग का वर्णन किया ।  बालकांड के  अनुसार प्रवचन देते पूज्य महाराज  ने कहा कि इस समय भगवान राम के चरित्र को सुनना, समझना तथा आत्मसात करना समाज की महती आवश्यकता है । भगवान राम की कथा सुनने तथा उसे आत्मसात करने के बाद व्यक्ति के मन से हर प्रकार की शंका स्वतः ही दूर हो जाती है । 

    गुरु महिमा पर प्रवचन देते हुए महाराज  ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण के प्रारंभ में गुरू महिमा बताते हुए लिखा की  * *बंदऊं गुरु पद पदुम परागा । सुरूचि सुबास सरस अनुरागा।।* *अमिअ मूरिमय चूरन चारू । समन सकल भव रूज परिवारू।।* अर्थार्त - मैं गुरू महाराज के चरण कमलों की रज की बंदना करता हुं ,जो सुरूचि (सुन्दर स्वाद )सुगंध तथा अनुराग रुपी रस से पूर्ण है ।वह अमर मूल (संजीवनी जड़ी )का सुंदर चुर्ण है,जो संपूर्ण भव रोगों के परिवार को नाश करने वाला है।   

 

 

इस तरह संत श्री ने कथा महात्म्य सुनाते हुए कहा कि  में गुरु के चरणों की रज की वंदना की है अतः गुरु सर्वश्रेष्ठ है इस जगत में ब्रह्मा विष्णु व महेश के साक्षात स्वरूप गुरु को ही कहा गया है ।

 

रामायण जी की सुंदर व मधुर चौपाइयां सुनकर श्रोता भाव विभोर नजर आए ।  

 

इस अवसर पर इस अवसर पर विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़,महेंद्र सिंह राठौड़, जयसिंह श्याम गौशाला सेवा समिति अध्यक्ष श्याम सिंह राठौड़,   ,  वैष्णव,नारायण लाल कंसारा,   हीरा दास,नाथुदास , शिक्षक मुकेश वैष्णव, महेंद्र वैष्णव, गौभक्त सुरेश कुमावत,धर्मु भाई गुर्जर सियाणा गौशाला,परशराम जी तेली, मोहन लाल कुमावत,सुख लाल कुमावत  विभिन्न संत वृंद व सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे ।

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