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राजसमन्द / निश्छल भक्ति व प्रेम भाव से ही प्राप्त होगा प्रभु का सामीप्य: पुरोहित

निश्छल भक्ति व प्रेम भाव से ही प्राप्त होगा प्रभु का सामीप्य: पुरोहित
Rajsamand today ✍️✍️ Suresh bagora June 16, 2024 10:07 PM IST

 

-मीरां के भक्तिमय चरित्र चित्रण पर भाव विह्ल हुए श्रद्धालु

 

-सियाणा गौशाला में गौ मीरां मैया कथा कार्यक्रम का समापन आज 

 

 

राजसमन्द:संत हरे कृष्णा प्रभुजी राकेश पुरोहित ने कहा कि मीरां मैया ने समस्त सांसारिक मोह-माया एवं कामनाओं से पूर्णतया विरक्त होकर अपना सर्वस्व भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था। विपरीत परिस्थितियों में भी वे प्रभु भक्ति में लीन रही एवं सबकुछ भूला बैठी और इस तरह आखिरकार वे अपने प्रियतम में ही विलीन हो गई। यदि हमें भी प्रभु को प्राप्त करना है, उनका सामीप्य पाना है तो मीरांबाई की भांति निश्छल भाव से प्रभु को भजना होगा, नश्वर सांसारिक पदार्थो व वासनाओं से मोह त्याग कर प्रभु से प्रेम करना होगा।       

 

संत ने ये उद्गार श्रीधेनू गोपाल गौशाला सेवा समिति के तत्वावधान में केलवा-आमेट रोड़ पर सियाणा स्थित गौशाला में चल रहे गौ-मीरां मैया कथा महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को कथा प्रसंगों पर व्यक्त किए। श्रीराम जय राम जय जय राम संकीर्तन के साथ कथा शुरू करते हुए कहा कि भक्ति मार्ग पर वही जीव चलता है, जिस पर भगवान की कृपा होती है। अर्थात जिस व्यक्ति को प्रभु पर पूर्ण विश्वास होता है, उसके कदम आत्म भक्ति मार्ग पर चलते हैं। मीराबाई के बालमन में कृष्ण की ऐसी छवि बसी थी कि जीवन पर्यन्तकृष्ण को ही अपना सब कुछ माना। उन्होंने भक्तिमति मीरां मैया के प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम व भक्तिपंथ पर आए कष्टों का वर्णन करते हुए कहा कि यह मीरा की प्रबल भक्ति व अटूट आस्था का ही प्रताप था कि विष अमृत एवं सर्प नौलखा हार बन गया। वैरागी मीरां को प्रभु भक्ति से पृथक करने के लिए लाख जतन किए गए परन्तु सब व्यर्थ हो गए, उल्टा मीरांबाई की भक्ति व प्रभु के प्रति आस्था और अगाध हो गई। कथा प्रवाह में उन्होंने गिरधर गोपाल की मूर्ति चोरी का षड़यंत्र, मीरांबाई का आम जनमानस के प्रति प्रेम, मीरां मैया का नर भक्षी सिंह से सामना, भूत हल में रात्रि विश्राम सहित मीरां के भक्तिमय जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। मीरांबाई को भक्ति मार्ग में आए अनेकानेक कष्ट के तहत मीरां मैया को मारने के लिए विषा का प्याला देने एवं सर्प का पिटारा भिजवाए जाने जैसे मार्मिक प्रसंगों का जब जीवंत वर्णन हुआ एवं इस दौरान संत ने विष का प्याला राणाजी भेज्या दीज्यो मीरां ने जाय...जैसे भजनों के स्वर बिखेरे तो श्रद्धालु भाव-विह्ल हो गए तथा नेत्रों से अश्रु छलक पड़े।   

कथा के प्रारम्भ में आयोजन समिति सदस्यों ने व्यासपीठ पूजन व कथावाचक संत का स्वागत किया। इससे पूर्व संतजनों व गोभक्तों की उपस्थिति में पुष्टि यज्ञ व गोपूजन हुआ वहीं तुलसी पूजन भी किया गया। आयोजन समिति सदस्यों ने वृंदावन व अयोध्या से आए संतों का सम्मान किया। ग्वाल संत बालकृष्ण, चित्तौड़गढ़ से आए अतिरिक्त कलक्टर सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित, कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़, आमेट प्रधान अनसी बाई गुर्जर, राजसमंद प्रधान अरविंद सिंह राठौड़, आदि अतिथियों का उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया। इधर, तीसरे दिन भी तुलादान के तहत गौसवार्थ सहयोग देने का क्रम जारी रहा जहां गौशाला संचालन के लिए कई गोभक्तों ने विभिन्न प्रकार की सामग्री आदि प्रदान की। चार दिवसीय महोत्सव का समापन सोमवार को आखरी पड़ाव के प्रसंगों के वर्णन के साथ होगा।  

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