राजसमंद।निचली मियारी में आयोजित श्री ओंकारेश्वर महादेव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत चल रही ‘नानी बाई का मायरा’ कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। रामस्नेही संत श्री रामचरणजी महाराज ने कथा वाचन करते हुए भक्ति, आस्था और सामाजिक व्यंग्य के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कथावाचक महाराजश्री ने नरसी मेहता की निर्धनता और समाज के तानों पर व्यंग्य करते हुए बताया कि जब मनुष्य सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है तो स्वयं श्रीकृष्ण भक्त की लाज रखने के लिए आगे आते हैं। कथा के दौरान उन्होंने समाज में व्याप्त दिखावे, अहंकार और रिश्तों में बढ़ती औपचारिकता पर कटाक्ष किया।महाराजश्री ने व्यंग्यात्मक शैली में कहा कि आज का समाज मायरे को प्रतिष्ठा और प्रदर्शन से जोड़ देता है, जबकि वास्तविक मायरा तो श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने समझाया कि नरसी मेहता के पास धन नहीं था, लेकिन भक्ति की संपत्ति इतनी प्रबल थी कि भगवान को स्वयं मायरा भरने आना पड़ा।
कथा के प्रसंगों में जहां हास्य और व्यंग्य से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया गया, वहीं भावुक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। कथा स्थल भजन-कीर्तन और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत यज्ञ-हवन और पूजन अनुष्ठान भी विधिवत जारी हैं। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है।आयोजन समिति के अनुसार कथा आगामी दिनों में भी प्रतिदिन सायं आयोजित होगी।

