
-सियाणा गौशाला में गौ मीरां मैया कथा महोत्सव सम्पन्न
राजसमन्द/केलवा, 17 जून। श्री धेनू गोपाल गौशाला सेवा समिति सियाणाा की ओर से समीपवर्ती सियाणा ग्राम स्थित गौधाम प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय गौ मीरां मैया कथा महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को संत हरे कृष्णा प्रभुजी राकेश पुरोहित ने भक्त शिरोमणी मीरांबाई के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का गुणगान किया।

आखरी दिन सुबह संतों व गोभक्तों की उपस्थिति में गौशाला में पुष्टि यज्ञ हुआ जिसमें कई यजमानों ने भागीदारी कर आहुतियां दी। फिर विधिपूर्वक गोपूजन हुआ जिसमें सभी ने गौमाताओं को तिलक लगाया एवं आरती उतार कर आशीर्वाद लिया वहीं गौसेवा भी की। साथ ही कथा पाण्डाल में तुलसी पूजन किया गया। इसके बाद कथा शुरू हई जिसके प्रारम्भ में आयोजन समिति सदस्यों ने व्यासपीठ पूजन किया वहीं कथावाचक संत का उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया। हरिनाम संकीतर्नन के साथ शुरूआत करते हुए कथा के आखरी पड़ाव में संत ने श्रीकृष्ण की प्रेम दीवानी मीरांबाई को भक्ति पथ से विमुक्त करने के लिए राणाजी द्वारा अनेकानेक कष्ट व पीड़ाएं पहुंचाने, मीरां मैया को गोस्वामी तुलसीदास का पत्र प्राप्त होने तथा इसके उपरांत मीरांबाई के अपने ससुराल चित्तौड़ का परित्याग करने के प्रसंग का वर्णन किया। इसी क्रम में मीरां के मेड़ता से यात्रा कर पुष्कर जाने एवं इसके बाद मेड़ता से वृन्दावन यात्रा पर प्रस्थान करने तथा वहां से भ्रमण करते हुए द्वारिकाधीश के धाम में पदार्पण करने, वहां दिव्य द्वारिका के दर्शन करने व अंत में मीरांबाई का अपने आराध्य प्रभु द्वारिकाधीश की मूर्ति में समाहित होने के प्रसंग का सजीव वर्णन किया। मीरां मैया के प्रभु विरह में व्याकुल होने एवं आखिर में प्रभु में विलीन हो जाने के प्रसंग का जब संत ने भावपूर्ण ढंग से जीवंत चित्रण किया तो उपस्थित श्रद्धालु मां मीरां व प्रभु प्रेम के अतिरेक में भाव विह्ल हो गए। इस दौरान प्रभु द्वारिकाधीश एवं मीरां मैया के जयकारों से समूचा परिवेश गूंज उठा ावहीं प्रभु प्रेम में भाव विह्ल हुए कई श्रद्धालुओं के नेत्र छलक पड़े। उक्त प्रसंगों पर भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। कथा के दौरान मीरांबाई से जुडत्रे कई भजन भी प्रस्तुत किए जिन पर श्रद्धालु झूमने लगे।
इधर, कथा के दौरान गौसेवार्थ सहयोग देने के लिए तुलादान का क्रम चला जिसमें गौप्रेमियों ने खूब बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। स्थानीय क्षेत्र व विभिन्न स्थानों से आए भक्तों ने श्रद्धानुसार सहयोग राशि प्रदान की वहीं गोग्रास, गुड़, हरा, चारा आदि दान कर गौसेवा का लाभ लिया। महोत्सव के दौरान द खंडा क्रेजी एसोसिएशन राजसमंद की ओर से पांच लाख इक्यावन हजार रूपए सहयोग राशि प्रदान की गई जिस पर सभी ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। इस दौरान कथा प्रवक्ता पुरोहित ने गौसेवा के प्रति क्षेत्र के जनमानस में दिखे उत्साह की सराहना की तथा कहा कि गौमाता की सेवा सबसे बड़ी व पुण्यदायी सेवा है क्योंकि गौमाता में सभी देवताओं का निवास होता है। यह संसार रूपी सागर को पार कराने के लिए वैतरणी के समान है। कार्यक्रम में अयोध्या से आए गोपाल दास महाराज, मुंगाना सांवलिया धाम से आए अनुजदास महाराज, वृंदावन से हरिदास व प्रमोद दास महाराज, दादू संप्रदाय से गोपाल दास,, जुलन्दास, ग्वाल संत बालकष्ण सहित कई संत एवं क्षेत्र के प्रबुद्धजन सम्मिलित थे। समिति की ओर से उनका स्वागत किया गया।

