राजसमन्द 8 जून/ राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ की जिला शाखा व शिक्षा विभागीय मंत्रालयिक कर्मचारी समिति ने राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) के प्रदेशाध्यक्ष द्वारा मंत्रालयिक कर्मचारियों के दायित्व व कर्तव्यों के निर्धारण के संबंध में दिए गए बयान को आपत्तिजनक बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। सरकार से इस पर कार्यवाही करने की मांग को लेकर महासंघ की जिला शाखा के जिलाध्यक्ष छगन पालीवाल तथा शिक्षा विभागीय मंत्रालयिक कर्मचारी समिति के अध्यक्ष चन्द्रशेखर श्रीमाली के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल को ज्ञापन सौंपा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में विगत गहलोत सरकार द्वारा मंत्रालयिक कर्मचारियों की पदौन्नति के अवसरों में वृद्धि करते हुए प्रशासनिक अधिकारी व संस्थापन अधिकारी के नए पद सृजित किए गए थे। पद सृजित होने के बाद इन पदों के विभागों द्वारा कर्तव्यों एवं कायोर्ं का निर्धारण नहीं किए जाने से इन पदों का विभागों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। जिस पर विगत एक जून को माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर द्वारा शिक्षा विभाग में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों के संस्थापन एवं प्रशासनिक अधिकारियों के दायित्व व कार्यों का निर्धारण किया गया था। परंतु रेसा के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण गोदारा द्वारा निदेशक को ज्ञापन देकर इस निर्धारण का विरोध करते हुए ऎसा करने से कायोर्ं के निस्तारण में विलंब होने और विभाग में भ्रष्टाचार पनपने की संभावना जताई है। जिसका महासंघ ने पूरजोर विरोध करते हुए मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से प्रदेशाध्यक्ष के विरूद्ध कार्यवाही करने की मांग की है। महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि किसी भी सूरत में मंत्रालयिक कर्मचारियों के हकाें पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से मंत्रालयिक कर्मचारियों ने इसके अलावा अपनी पदौन्नति तथा ग्रेड पे के संबंध में विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग की है।

