राजसमन्द 6 जून/ विश्व पर्यावरण दिवस पर सेठ रंगलाल कोठारी राजकीय महाविद्यालय राजसमंद एवं भारतीय सांस्कृतिक निधि के संयुक्त तत्वाधान में ‘पर्यावरण संरक्षण - चिंतन एवं कार्य‘ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में देशभर के 7 राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, एवं राजस्थान के 300 से अधिक व्याख्याताओं, विचारकों एवं विधार्थियों ने भाग लिया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रचना तैलंग ने वेबिनार का शुभारम्भ करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस कोरोना वैश्विक संकट में आज संसार पर्यावरण की ओर लौट रहा है, पर्यावरण परक रोजगार बढाकर युवाओं को अपनी मिट्टी से जोड़ने की आवश्यकता है। इस अवसर पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मिलाप पुनिया ने जलवायु परिवर्तन, धारणीय विकास पर, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्रोेफेसर बी.आर. बामनिया ने भूमी अपरदन, पर्यावरण पतन, पारिस्थितिकी असन्तुलन पर विस्तार से बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय के डिप्टी प्रोक्टर और सामाजिक विकास संस्थान के अध्यक्ष डा.ॅ राजकुमार फलवारीया ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियन विकास बैंक की समालोचना की।
इस अवसर पर भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी, भेराराम चौधरी जॉइन्ट कमिश्नर (आयकर) मुम्बई ने पर्यावरण असन्तुलन से उत्पन्न हुए सामाजिक व आर्थिक नुकसान का आकलन करते हुए अनुकूलतमता प्राप्त करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय से शकुंतला शर्मा, डॉ. सुमन बड़ोला, डॉ. दिनेश हंस, प्रेम सिंह चौहान एवं राजकीय महाविद्यालय ब्यावर से डॉ. एम.आर. सिंघरिया सहित 25 से अधिक प्रोफेसर वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार रखे। वेबिनार का संचालन डॉ. कृष्ण कुमार कुमावत, सहायक आचार्य ने किया। वेबिनार का तकनीकी संचालन गजराज सिंह एवं सोहनलाल गोसाई सहायक आचार्य और नीति आयोग के अधिकारी जगदीश विश्नोई ने किया। वेबिनार का आयोजन जूम एप एवं फेसबुक पर लाईव किया गया। कार्यक्रम के अंत में सोहनलाल गोसाई ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

