कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमन्द कोरोना संक्रमण (कोविड 19) को महामारी घोषित किये जाने से माननीय सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देषानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद द्वारा कारागृह में निरूद्ध बंदियों को कोरोना के संक्रमण से बचाव हेतु कारागृह में भीड़ कम करने के उद्देष्य से जमानत आवेदन प्रस्तुत करने की पहल की गयी। श्री नरेन्द्र कुमार, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजमसंद ने बताया कि माननीय सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देषानुसार ऐसे बंदी जिनके विरूद्ध अधिकतम 7 वर्ष तक दण्ड के प्रावधान हो, अन्य कोई मुकदमा विचाराधीन ना हो तथा राजस्थान का मूल निवासी हो, प्रथम बार अपराध किया हो तथा मजिस्ट्ेट द्वारा विचारणीय प्रकरण में निरूद्ध हो लाॅक डाउन के दौरान चिन्हित कर संबंधित न्यायालय के समक्ष जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत करनंे हेतु निर्देषित किया गया जिस क्रम में दिनंाक 09.04.2020 तक अतंर्गत धारा 437 सीआरपीसी के तहत कुल 16 जमानत आवेदन पत्र संबधित न्यायालय के समक्ष पेष किये गये जिस पर 05 जमानत आवेदन पत्रों को स्वीकार कर बंदियों को रिहा किया गया तथा धारा 439 सीआरपीसी के तहत कुल 06 जमानत आवेदन पत्र संबधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किये गये। इसी प्रकार किषोर न्याय बोर्ड अधिनियम धारा 12 के तहत विधि से संघर्षरत बालक जो संप्रेषण गृह राजसमंद में निरूद्ध है के 03 जमानत/सुपुर्दगी आवेदन पत्र किषोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किये गये जिस पर 02 जमानत/सुपुर्दगी आवेदन पत्र स्वीकार होकर विधि से संघर्षरत बालक को परिजनो के सुपुर्द किया गया तथा संप्रेषणगृह में निरूद्ध 07 बालकों के जमानत आवेदन पत्र किषोर न्याय बोर्ड, उदयपुर तथा 03 जमानत आवेदन पत्र किषोर न्याय बोर्ड बांसवाड़ा को प्रेषित किये गये। उल्लेखनीय है कि लाॅक डाउन के दौरान श्री गिरीष कुमार शर्मा, अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद की अध्यक्षता मे अंडर ट्ायल रिव्यु कमेटी की बैठक का आयोजन प्रतिसप्ताह किया जा रहा है। दिनांक 30.03.2020 को आयोजित अंडर ट्ायल रिव्यु कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया कमेटी द्वारा कुल 36 प्रकरणों में बंदी रिहा करने की अनुषंसा की गयी जिनमें से 08 बंदियों को रिहा किया गया तत्पष्चात् द्वितीय सप्ताह में दिनांक 09.04.2020 को आयोजित बैठक में कुल 39 प्रकरणों बंदी रिहा करने की अनुषंसा की गयी जिनमें से 11 बंदियों को रिहा किया गया।

