इन दिनों विश्व के अधिकांश देश कोरोना संक्रमण से त्रस्त है। जबकि सरकार ने लाक डाउन की घोषणा कर रखी है। जिससे सभी बाजार बंद है लोगों का घर से बाहर निकलना बंद है। ऐसे मे बाजारों और गली मौहल्लों मे घूमकर अपना पेट भरने वाले गली के श्वानों और गोवंश के भूखे मरने की नौबत आ गयी है। राजसमंद की एक महिला रानी बाला अपने परिवार और सहयोगियों के साथ मिलकर प्रतिदिन करीब दस किलो आटे की रोटियां बनाकर इन श्वानों का पेट भरने का काम कर रही है। उनका मानना है कि सरकार ने गरीब लोगों के भोजन की व्यवस्था कर दी है लेकिन बेजूबान को भी भूख लगती है उनके लिये भी कुछ होना चाहिये। रानी प्रतिदिन खुद के खर्च से यह रोटी और बिस्किट लाकर शाम को करीब पांच किलोमीटर के ईलाके मे घूमकर उन्हे भोजन करवाने के साथ बिमार अथवा घायल होने पर इन जानवरों का उपचार कर रही है। यह कार्य प्रतिदिन ड्यूटी पर तैनात पुलिस और चिकित्साकर्मीयों के लिये चर्चा का विषय है इसके साथ ही आमजनों के लिये भी प्रेरणा देता है कि इन बेजुबानों के लिये भी एक रोटी की व्यवस्था करे।

