राजसमंद के केलवा क्षेत्र में खटामला ग्राम पंचायत में श्रावण मास के उपलक्ष में पार्थिव शिवलिंग बनाकर ग्रामीण पूजा अर्चना कर रहे हैं पार्थिव शिवलिंग का अर्थ होता है मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा-अर्चना करना.मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर कूच करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी. मान्यता है कि कलयुग में भगवान शिव का पार्थिव पूजन कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था. जिसके बाद से अभी तक शिव कृपा बरसाने वाली पार्थिव पूजन की परंपरा चली आ रही है. शास्त्रों में वर्णित है कि शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा पराक्रम पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी.
पार्थिव शिवलिंग की पूजा का महत्व (Parthiv Shivling Puja Mahatva)
शिवपुराण के अनुसार सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में समस्त कष्ट दूर होकर सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं. पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले शिवसाधक के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है एवं भगवान शिव के आशीर्वाद से धन-धान्य,सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इनकी पूजा से अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. शिव महापुराण में दिए गए श्लोक 'अप मृत्युहरं कालमृत्योश्चापि विनाशनम। सध: कलत्र-पुत्रादि-धन-धान्य प्रदं द्विजा:।' के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा से तुरंत ही जो कलत्र पुत्रादि यानी कि घर की पुत्रवधु होती है वो शिवशंभू की कृपा से घर में धन धान्य लेकर आती है. इनकी पूजा इस लोक में सभी मनोरथ को भी पूर्ण करती है. जो दम्पति संतान प्राप्ति के लिए कई वर्षों से तड़प रहे हैं, उन्हें पार्थिव लिंग का पूजन अवश्य करना चाहिए.
विसर्जन व शोभा यात्रा का होगा आयोजन
खटामला में चावंडा माता प्रांगण में पार्थिव शिवलिंग महोत्सव चल रहा है सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन ,विसर्जन 16 अगस्त को प्रातः 9.00बजे होगा, उससे पहले हवन यज्ञ 17अगस्त को प्रातः10बजे व विशाल भोलेनाथ प्रभु की शोभा यात्रा का आयोजन होगा, जो कि पूरे गांव में होते हुए गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी जिसमें आसपास के कई ग्रामीण भी मौजूद होंगे,त्पश्चात प्रसाद का आयोजन होगा.

