राजसमंद: होली जलने के सातवें दिन मेवाड़ क्षेत्र में परंपरागत रूप से शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-संवरकर सुबह से ही शीतला माता मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं।काकरोली के विभिन्न शीतला माता मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। महिलाओं ने कतारबद्ध तरीके से शीतला माता थानक पर पूजा की और एक दिन पहले बनाए गए दही एवं ठंडे पकवानों का भोग अर्पित किया। इसके साथ ही अपनी संतान और परिवार के उत्तम स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की कामना की।मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा करने से त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाव होता है। वहीं चिकित्सा विज्ञान में भी माना जाता है कि मौसम परिवर्तन के दौरान त्वचा रोगों की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में ठंडी तासीर वाले भोजन और इस व्रत को लाभकारी माना जाता है।धार्मिक कथाओं में भी माता शीतला के जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख मिलता है, जिसके चलते यह पर्व विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है।परंपरा के अनुसार दोपहर बाद क्षेत्र में पानी और रंगों से होली खेलने का सिलसिला भी शुरू होगा, जिसमें लोग उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।

