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राजसमन्द / सम्पूर्ण विश्व को सनातन की शरण में आना ही होगा - महंत ज्ञानानंद सांगठ में पंच परिवर्तन विषय पर हुआ मंथन, गौसेवा और सामाजिक एकता का लिया सामूहिक संकल्प

सम्पूर्ण विश्व को सनातन की शरण में आना ही होगा - महंत ज्ञानानंद    सांगठ में पंच परिवर्तन विषय पर हुआ मंथन, गौसेवा और सामाजिक एकता का लिया सामूहिक संकल्प
सुरेश बागोरा Rajsamandtoday✍️✍️✍️ February 18, 2026 09:47 PM IST

 

सनातन मूल्यों को अपनाना ही विश्व कल्याण का मार्ग : महंत ज्ञानानंद 

 

राजसमंद: राजसमंद जिले के सांगठकला स्थित श्री हरिपायरा भेरूजी मंदिर प्रांगण में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज, संस्कार और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, समाजजन, युवाओं और मातृशक्ति की भागीदारी रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अतिथियों के पारंपरिक स्वागत से हुआ। सम्मेलन को संबोधित करते हुए महंत ज्ञानानंद ने कहा कि भारत की भूमि देवताओं द्वारा निर्मित मानी जाती है और यहां का धर्म सनातन और शाश्वत है। उन्होंने कहा कि भारत आध्यात्म, समृद्धि और ज्ञान-विज्ञान के कारण पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि निरंतर साधना और संस्कारों के कारण ही राष्ट्र का गौरव बना हुआ है और सम्पूर्ण विश्व को सनातन मूल्यों को अपनाना होगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक महिपाल सिंह ने कहा कि इतिहास में अनेक आक्रमणों के बावजूद हिन्दू समाज ने अपने अस्तित्व को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि विभाजित और आत्मविस्मृत समाज को संगठित करने के उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। उन्होंने समाज को संगठित कर राष्ट्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। महिपाल सिंह ने कहा कि मेवाड़ क्षेत्र के लोगों में राष्ट्रभक्ति स्वाभाविक रूप से मौजूद है। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षित रहेगा तो समाज भी सुरक्षित रहेगा। भारत यदि मजबूत बनेगा तो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। मंच पर संत मनमोहन पूरी भी उपस्थित रहे। धर्मसभा के अंत में उपस्थित लोगों को धर्मानुसार आचरण करने, गौ सेवा करने और सामाजिक एकता बनाए रखने का संकल्प दिलाया गया। इसके बाद भारत माता की सामूहिक आरती की गई।

 

 

सम्मेलन से पूर्व 501 मंगल कलश के साथ भव्य शोभायात्रा :

 

सम्मेलन से पूर्व 501 मंगल कलश के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा लगभग दो किलोमीटर तक चली। इसमें महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में मंगल कलश लेकर भाग लिया। युवाओं ने भगवा ध्वज के साथ जयघोष करते हुए उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। रास्ते में समाजजनों और व्यापारियों द्वारा पुष्पवर्षा और आतिशबाजी कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में सांगठ, पुठोल, पिपलांत्री, बड़ी मोरवड़, छोटी मोरवड़, धर्मेटा, दमाला सहित कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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