आमेट - उपखंड आमेट के समीप राजस्व गांव ढेलाणा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आज महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 202वीं जयंती मनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक प्रधानाचार्य संजू शर्मा ने की। आज के मुख्य वक्ता जगदीश सिंह चुंडावत ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी का जन्म 12 फरवरी 1824 ई को टंकारा, गुजरात राज्य के ब्राह्मण परिवार में हुआ। महर्षि दयानंद सरस्वती महान विचारक, समाज सुधारक के साथ स्त्री शिक्षा, वेदों के प्रचार, गौ रक्षा के समर्थक रहे । इन्होंने आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 ई को मुंबई में की। दयानंद सरस्वती जी ने "वेदों की ओर लौटो" का मुख्य नारा दिया । शारीरिक शिक्षक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती मूर्ति पूजा, छुआछूत तथा बाल विवाह,अन्धविश्वास जैसी कुरीतियों के घोर विरोधी थे । इनके बचपन का नाम मूल शंकर था। इनके अनुयायियों ने डीएवी स्कूलों, कॉलेजों की एक विशाल शृंखला स्थापित की । दयानंद सरस्वती जी ने स्वराज शब्द का प्रयोग 1876 में किया। इनकी प्रमुख रचना सत्यार्थ प्रकाश है। 30 अक्टूबर 1883 दीपावली के दिन दयानंद सरस्वती जी का निधन हो गया। कार्यक्रम में राजू पावण्डा, मुकेश गूगड, चुन्नीलाल रेगर, गोपाल टेलर, लता शर्मा, संजू शर्मा के साथ विद्यार्थी रवि, सोनिया, योगेश, कृष्णा, नव्या, ममता आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नारायण लाल रेगर ने किया। यह जानकारी जगदीश सिंह चुंडावत ने दी।

