राजस्थान में पशुधन रखने वाले पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है. यहां सरकार ने पिछले 5 सालों से बंद पशुधन बीमा योजना को फिर से शुरू किया है. इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. इन निर्देशों को आधार कर ही पशु की कीमत बीमा कंपनी द्वारा तय की जाएगी. इसके बाद बीमा होगा.
लंपी रोग ने राजस्थान के कई जिलों में जमकर कहर बरपाया. इस रोग के कारण गोवंश की मौत होने से पशुपालकों पर दोहरी मार पड़ी. दूधारू पशु की मौत के बाद कई पशुपालकों के सामने घर का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया था. परेशानी के इस वक्त में सरकार ने पशुपालकों को संबल प्रदान करते हुए पांच साल से बंद पशुधन बीमा योजना को फिर से शुरू कर दिया है. केन्द्र सरकार ने नेशनल लाइव स्टोक मिशन के तहत रिस्क मैनेजमेंट के तहत संचालित पशुधन बीमा योजना को फिर से शुरू कर दिया है. द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को जिले में पशुओं का बीमा करने के लिए अधिकृत किया गया है.
पशुपालन विभाग के अधिकारियों की माने तो प्रत्येक परिवार के अधिकतम पांच पशुओं का बीमा किया जाएगा. जिले में लंपी से ग्रसित अबतक तीन हजार से अधिक गौ व भैंसवंश की मौत हो चुकी है. अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत पशुओं का बीमा करवाने के लिए बीमा का वार्षिक भुगतान 4.42 प्रतिशत पशुपालक को देना होगा, जो प्रीमियम दरें एससी एसटी व बीपीएल पशुपालकों के लिए प्रीमियम का 70 प्रतिशत अंश केन्द्र व राज्य सरकार वहन करेगी. पशुओं की कीमत पशुओं के स्वास्थ्य व दूध उत्पादन क्षमता के आधार पर पशु चिकित्सक व बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की और से तय की जाएगी.
पशुपालकों को बीमा कराने के लिए कई सहुुलियत प्रदान की है, बीमा कराने के लिए पशुपालकों को नजदीकी पशु चिकित्सा केन्द्र पर प्रभारी से सम्पर्क करना होगा. जहां पर वो अपने पशु का आसानी से बीमा करवा सकता है. हालांकि आवेदन पत्र, पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, पशु के कान में लगे टैग सहित फोटो, बीपीएल कार्ड, एससीएसटी से संबंधित दस्तावेज की प्रति, बैंक का नाम,खाता संख्या, आईएफसी कोड, आधार कार्ड, प्रीमियम राशि पशुपालक को देनी होगी.पशु का टैग खोने पर कंपनी को 48 घंटे के अंदर इसकी सूचना कंपनी को देनी होगी.
पशु की मौत हो जाने पर कंपनी को मोबाइल, ईमेल आदि पर सूचना देनी होगी. बीमा प्रमाण पत्र, क्लेम फार्म भरकर बीमा कंपनी को उपलब्ध कराना होगा, मृत पशु की मौत पर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र देना होगा.

