राजसमन्द / मेवाड़ मे आज मनाई जा रही आंवला नवमी,दीपावली के नवे दिन होती हैं आंवले के पेड़ की पूजा
मेवाड़ और मारवाड़ मे वर्षो से चली आरही आंवला पूजन की परंपरा ,
- मेवाड़ और मारवड़ मे दीपावली के नवे दिन यानि नवमी को आंवला नवमी के रूप मे मानाने की परंपरा सदियों पुरानी हैं। इस दिन कार्तिक स्नान करने वाली विवाहिता महिलाये पारम्परिक वेशभूषा मे तैयार होकर सुबह से व्रत रखती है दोपहर बाद यह महिलाएं जंगल अथवा उद्यान मे जाती हैं। जहां आंवले के वृक्ष की कुमकुम,चावल,कपड़ा, मोली,फल और कद्दू जैसे बड़े फल से पूजा की जाती हैं। इस मौक़े पर महिलाये पूजन के बाद आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। इसके अलावा आंवले के फल की माला बनाकर भी वृक्ष को चढ़ाई जाती हैं। मान्यता हैं की आयुर्वेद में आंवले के औषधि गुना और पर्यावरण संरक्षण की भावना से इस पूजन को विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। पूजन के दौरान यह मान्यता की जाती है कि परिवार में सभी निरोगी और सुखी रहे। कहानी सुनती है और अवल के वृक्ष की परिक्रमा करने के बाद बुजुर्ग महिलाओं से आरोग्य का आशीर्वाद लेती है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को बुजुर्ग महिलाएं लगातार निभाती आई है वहीं नवयुग दिया भी इसे अपने जीवन में अपनाने लगी है। आस्था और प्रकृति प्रेम का यह अनूठा पर्व मेवाड़ और मारवाड़ में पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता हैं।