राजसमन्द / भागवत पोथी नहीं, ज्ञान व मोक्ष का भंडार है गौनंदन पं विकास नागदा

 

भागवत कथा का पहला दिन

चारभुजा

 

 

धार्मिक नगरी चारभुजा जी के श्री चरणों में मंदिर चौक प्रांगण में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की शुरुआत हुई। कथावाचक गो नंदन पंडित विकास नागदा ने भागवत कथा से पहले समवेत स्वर में सुंदरकांड का पाठ संपन्न करवाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि भागवत पोथी नहीं, ज्ञान व मोक्ष का भंडार है जिसे आत्मसात कर जीवन में उतारना पड़ता है। इसके लिए स्वयं को स्वार्थ से मुक्त करना होगा। ज्ञान योग व कर्म योग यह दोनों मिलकर ही जीवन को पूर्णता देते हैं। उन्होंने कृष्ण के प्रति मीरा की अनन्य भक्ति को साधना व समन्वय का संबंध बताया। उन्होंने कहा कि कृष्ण चाहे जिस देवालय में रहते हो, लेकिन मीरा जैसी भक्त अपनी आंखों से आंसुओं की बूंदों को ढुलकाते ढुलकाते गा ही पड़ती है। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई। विष का प्याला भी अमृत मान पी जाती है। भागवत कथा ग्राम वासियों के सहयोग से करवाई जा रही है। भागवत कथा में सेवा देने वालों में रमेश गुर्जर ललित माली स्थानीय सरपंच धर्मचंद सरगरा अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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