राजसमन्द / आपदा प्रबन्धन के लिए जिला कलक्टर ने दिये विभागों को निर्देश समय रहते सभी ऐहतियाती इंतजाम सुनिश्चित करें - अरविन्द कुमार पोसवाल

 

     राजसमन्द 26 मई/ जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल ने बरसात के मौसम के मद्देनज़र राजसमन्द जिले में आपदा प्रबन्धन के सभी ऐहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस बारे में सभी विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और इनके बेहतर निर्वहन के लिए कहा गया है। इसके लिए 15 जून से इन उपायों पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जन-धन के लिए सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने के लिए समुचित प्रबन्ध करने और जिला मुख्यालय पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने के लिए निर्देशित किया गया है।

     जिला कलक्टर ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए कि आगामी 15 जून से बाढ़ नियन्त्रण कक्ष की स्थापना करना सुनिश्चित करें तथा बाढ़ या अतिवृष्टि की संभावना में प्रत्येक तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों के लिये प्रभावी कार्य योजना तैयार करें। विभाग में उपलब्ध वायरलेस सेटों को कार्यशील रखे तथा नावों, रक्षा पेटियों, रस्सों, मसालों, टाॅर्च आदि  की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें । वर्षा काल में नदियां, नहरों, बांधों, तालाबों आदि का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें तथा वर्षा आने पर किसी बांध में दरार आने व टूटने की संभावना है तो उसे समय से पूर्व ठीक कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करें। बांध के गेट खोलने वाले तथा तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारियों की सूची बना कर अपने कार्य स्थल पर तैनात रहने के लिए पाबंद करें। किसी जलाशय की मरम्मत कराने की आवश्यकता हो तो यथा समय मरम्मत करवा दी जावे। यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है अथवा कोई बांध टूटता है या नदी में पानी अधिक आता है तो ऐसी स्थिति में कौन-कौन से गाँव प्रभावित हो सकते हैं,  उन गाँवों के नाम व उनकी जनसंख्या चिन्हित करें व उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने हेतु स्थल का निरीक्षण करें।

     उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि निचले क्षेत्रों से पानी निकालने हेतु पम्पसेटों की व्यवस्था सुनिश्चित की जावे तथा जहां बाढ़ आने की संभावना है, वहां अधिक पम्पसेटों की व्यवस्था करें। पेयजल स्त्रोंतो के क्लोरीफिकेशन की समुचित व्यवस्था की जावें ताकि दूषित पेयजल जनित बिमारियां फैलने की संभावना न हों। पाइप लाईन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में उसे तत्काल ठीक करें। विद्युत कटौति की अवस्था में पेयजल वितरण हेतु वैकल्पिक व्यवस्था की भी तैयारी समय पर करें।

     इसी प्रकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति (रसद ) विभाग को निर्देश दिए कि उचित मूल्य की दूकानों पर अतिवृष्टि अथवा बाढ़ के समय पर्याप्त मात्रा में जनमानस को खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें व बाढ की स्थिति में स्वयंसेवी संगठनों से सम्पर्क बनाये रखें ताकि आवश्यकता पडने पर उनसे सहयोग लिया जा सके। फूडस्टेम्प योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों को पहुंचाएं तथा जिले में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, लूब्रीकेटिंग आॅयल भी रिजर्व में रखवाया जाना सुनिश्चित करंे। उन्होंने नगरनिकायों को निर्देश दिए कि शहर की सडकों की मरम्मत व नाले/नालियों/गटर आदि की सफाई व्यवस्था 15 जून से पूर्व प्राथमिकता से करवा दें। निचले स्तर से प्रभावित व्यक्तियों/बस्तियों को ऊँचे क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रहने हेतु वहां स्थित धर्मशाला, सार्वजनिक स्थल, विद्यालय भवन आदि को चिन्ह्ति करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बाढ/अतिवृष्टि के एकत्रित पानी को निकालने के लिये पम्पसेटों का प्रबन्ध करना, मृत पशुओं, मलबा, कचरा आदि को हटाने एवं सुरक्षात्मक स्वास्थ्य उपाय जैसे मलेरिया रोधी उपाय, कटे हुए फलांे एवं सब्जियों को खुले में विक्रय पर प्रतिबंध आदि की व्यवस्था सुनिश्ध्चित करें।

     उन्होंने चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए कि वर्षा, अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति में बीमारी का प्रकोप होने की संभावना से निपटने के लिए जिले के समस्त रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उपस्वास्थ्य केन्द्रों एवं पोस्ट केन्द्रों पर पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक दवाईयां एवं उसके उपरान्त फैलने वाली बीमारियों यथा हेजा, पीलिया, मलेरिया, त्वचा रोग, फुड पाॅइजनिंग आदि के ईलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध रखी जावे। अतिवृष्टि या बाढ के दौरान आवश्यकतानुसार मोबाईल चिकित्सा दल के गठन की व्यवस्था करें तथा दूषित जल से बचाव हेतु क्लोरीन की पर्याप्त व्यवस्था रखी जावे। उन्होंने भारत दूरसंचार विभाग को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय नियन्त्रण कक्ष का टाॅल फ्री नम्बर 1077 को हर समय चालु स्थिति में  रखें व बाढ़/अतिवृष्टि से संचार व्यवस्था अस्त-व्यस्त न हो यह सुनिश्चित करें।

     उन्होंने डाक एवं तार विभाग को निर्देश दिए कि जलभराव या बाढ के दौरान टेलीग्राम व पोस्टल व्यवस्था हेतु विशेष व्यवस्था करें। जिला कलक्टर ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि होमगार्ड एंव आर.ए.सी. की प्रशिक्षित व अन्य कम्पनियांे की टीमों को तैयार रखी जावे। पर्याप्त मात्रा में तैराक एवं नावों की व्यवस्था, गौताखोरों, लाईफ जैकिट, रस्से, टार्च, संचार तंत्र, कानून व्यवस्था आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करें। प्रमुख बांधों पर सुरक्षागार्ड मय वायरलैस फोन की उपलब्धता सुनिश्चित करंेगे। विद्युत विभाग को निर्देश दिए कि वर्षा, अतिवृष्टि एवं बाढ़ के समय विद्युत लाईनों के क्षतिग्रस्त होने से जन जीवन पर विपरित प्रभाव पड़ता हैं। इसलिए क्षतिग्रस्त पावर लाईनों से तुरन्त विद्युत सम्बन्ध विच्छेद करने एवं मरम्मत हेतु आवश्यक सामग्री वाहन एवं विद्युत उपकरणों का पर्याप्त स्टाॅक उपलब्ध रखें। जहां कहीं विद्युत लाईने पेड़ों के नजदीक है उनकी जांच करवा कर सफाई व्यवस्था करें। ढीले तारों को कसा जाए व कनेक्शनों को टाईट किया जावें। यदि कहीं पर ट्रांसफार्मर जमीन पर पडें है, तो उन्हे डी.पी. पर रखवाये जावें।

     इसी प्रकार पशुपालन विभाग को निर्देश दिए कि बाढ/अतिवृष्टि के समय पशुओं में फैलने वाली बीमारियों के ईलाज के लिये पर्याप्त दवाईयों की व्ययवस्था सुनिश्चित करें व  जिला पशुपालन अधिकारी जिले के समस्त पशु चिकित्सालयों पर आवश्यक वैक्सीन एवं औषधियों की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण करने का स्थान भी सुनिश्चित करें। आपातकालीन सेवा हेतु वाहनों द्वारा टीकाकरण कार्य यथा समय शुरू कर दें। उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे सार्वजनिक भवनों की पहचान करें  जो वर्षाकाल में गिर सकते हैं, इनकी मरम्मत करवाना, तथा अनुपयुक्त पाये जाने पर उनको ध्वस्त करने संबंधी कार्य सुनिश्चित करें। सडक मार्ग से गुजरने वाले नदी-नाले, रपट, कलवर्ट आदि पर होकर वर्षा का पानी बह रहा हो तो, उन स्थानों को चिन्हित कर दोनो ओर साईन बोर्ड लगा कर यातायात प्रतिबन्धित किया जाए। संभावित खतरों वाले रपट, पुलियाओं पर लोहे की जंजीर की व्यवस्था की करें। नन्दसमन्द बाँध की नीचे वाली सड़क व काजवे जिसमें कांकरोली रेल्वे स्टेशन से रेलमगरा रोड़ पर भट्टखेड़ा गाँव से आगे बनास नदी पर बने सबमर्शियल पूल पर लकड़ी के बेरियर लगाकर पुलिया के उपर पानी भरने की स्थिति में आवागमन को नियंत्रित करेंगे। भट्टखेड़ा काजवे का पुनः निरीक्षण कर लिया जावें, ताकि कोई दुर्घटना होने की संभावना नहीं रहे। इसी प्रकार गौमती नदी पर बने काजवे पसून्द से तासोल रोड़ पर छापरखेड़ी के समीप तथा केलवा से आमेट रोड़ पर सियाणा के पास बने पूल पर गौमती नदी में पानी का स्तर बढ़ने पर आवागमन पर चैकसी रखी जावें।

     इसी प्रकार शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जिले के समस्त राजकीय व निजी विद्यालयों के भवनों की जांच करें ताकि आगामी वर्षा के दौरान अतिवृष्टि/बाढ़ से विद्यालय भवन को किसी भी प्रकार की क्षति होने की संभावना न रहे साथ ही समाज कल्याण विभाग अपने अधीन चल रहे छात्रावास भवनों की भी जांच करें। अपने अधीन पंचायत समिति के विद्यालय भवनों की जांच कर प्रतिवेदन अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी (शिक्षा) जिला परिषद को प्रस्तुत करेंगे। जिले के अन्य विद्यालयों/छात्रावासों के भवनों की सूचना संकलित कर जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजसमन्द को प्रस्तुत करेेंगे और यदि उन्हें खाली कराने की आवश्यकता हो तो तद्नुसार कार्यवाही संपादित करंें। उन्होंने राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि जिले के समस्त राजस्व अधिकारी जहां तक संभव हो मुख्यालय पर ही उपस्थित रहेंगे। वक्त भ्रमण वर्षा, अतिवृष्टि, बाढ़ एवं तालाबों, बांधों, एनीकटों की सूचना अपने अधीनस्थ राजस्व कर्मचारियों से प्राप्त करेंगे। उपखण्ड अधिकारी अपने-अपने क्षैत्रों में बाढ़ प्रभावित गांवों की सूची तैयार करवाएंगे। तहसील स्तर पर संबंधित विभागों द्वारा बाढ़ बचाव हेतु किये जाने वाले कार्यों की समीक्षा उपखण्ड अधिकारी करेंगे तथा संबंधित विभागों में सामंजस्य बनाए रखेंगे। तहसील स्तर पर स्थापित आपदा नियन्त्रण कक्ष द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान समय पर हो, इसकी पुख्ता व्यवस्था करेंगे। वर्षा की दैनिक सूचना, वितन्तु संदेश एवं दूरभाष पर जिला नियंत्रण कक्ष को एवं भू-अभिलेख अनुभाग को प्रस्तुत करेंगे।

     जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ एवं सहायता कार्य के लिए संबंधित चेतावनी एवं जानकारी जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी एवं उपखण्ड स्तर पर उपखण्ड अधिकारी एवं तहसील स्तर पर तहसीलदार/विकास अधिकारी द्वारा प्रचार-प्रसार किया जावेगा। उन्होंने पूल अनुभाग को निर्देश दिए कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष के लिए प्रभारी अधिकारी जिला पूल एक वाहन मय वाहन चालक सायंकाल 6.00 बजे से प्रातः 9.30 बजे तक उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि कि जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के प्रभारी अधिकारी उपखण्ड अधिकारी राजसमन्द होंगे। उन्हांेने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष जिले की समेकित सूचना तैयार कर प्रभारी अधिकारी (कलक्टर) को प्रस्तुत कर राज्य स्तर पर प्रेषित करना सुनिश्चित करेंगे।

     उन्हांेने समस्त विभागों को निर्देश दिए कि वे मानसून के दौरान अपने-अपने कार्यालयों में एक नियंत्रण कक्ष की स्थापना करें। उन्हांेने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित कर देवें कि मानूसन के समय बिना जिला कलक्टर की अनुमति के वे मुख्यालय नही छोडे़ं और अपने विभाग में उपलब्ध संसाधनों/उपकरणों के साथ सम्पर्क में रहेगें तथा सभी सम्बन्धित अधिकारियों/कर्मचारियों के नाम, पदनाम, टेलीफोन नम्बर, माबाईल नम्बर व पते सहित सूची कलक्ट्रेट को भिजवाते हुए उसकी प्रति अपने विभाग/कार्यालय में भी सुरक्षित रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे वांछित सहयोग प्राप्त किया जा सके।

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