राजसमन्द / पुष्टिमार्गीय मंदिरों में होलाष्ठक की धूम, द्वारकाधीश मंदिर में आज हुआ 84 खंभ मनोरथ, 84 वृक्षों के बीच निकुंज भाव से बिराजे भगवान द्वारकाधीश,
बृजवासी बालकों ने रसिया गाकर किया ठाकुर जी को रिझाने का प्रयास,
वर्ष भर में होली जलने से पूर्व होता है इस मनोरथ का आयोजन,
राजसमंद :जहां देश भर में होली के त्यौहार के मध्य नजर विभिन्न आयोजन किया जा रहे हैं वही पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के कांकरोली स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में होलाष्टक का उत्साह पूरे चरम पर है। मंदिर की परंपरा अनुसार कल होली मनाई जाएगी।उससे पूर्व आज राजभोग झांकी के बाद 84 खंभ मनोरथ का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर के चौक में 84 कदली फल के वृक्ष लगाकर उसके बीच ठाकुर जी को विराजित किया जाता है। यह नजर 84 कोस परिक्रमा और 84 गांव से मिलकर बने ब्रजभूमि में भगवान श्री कृष्ण की रासलीला को प्रदर्शित करता है। इस मनोरथ को निकुंज भक्ति परंपरा कहा जाता है। वहीं दर्शनों के दौरान बृजवासी बालको द्वारा रसिया का गायन किया जाता है। जिसमें राधा कृष्ण और गोपियों की भक्ति और छेड़छाड़ के गीत होते हैं। आम दिनों की अपेक्षा यह दर्शन अधिक समय तक खुले रहते हैं और शाम को रसिया गायन और राल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष मनोरथ में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालु पहुंचते हैं जिसमें खासकर गुजरात मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के श्रद्धालु बहुतायत संख्या में मौजूद रहते हैं।