राजसमन्द / राज्य में इन्दिरा रसोई ने छुआ एक करोड़ का आंकड़ा जिले में अब तक 1 लाख 38 हजार 128 लाभार्थियों को खिलाया भोजन

 

    राजसमन्द 14 दिसम्बर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के “कोई भूखा ना सोए” के संकल्प के साथ स्व. श्रीमती इन्दिरा गाँधी की जयन्ती पर शुरू की गई इन्दिरा रसोई योजना ने साढ़े तीन माह की अल्पकालिक अवधि में ही एक करोड़ लाभार्थियों को खाना खिलाने का आंकड़ा छू लिया है।

    नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल ने इन्दिरा रसोई के अल्पसमय में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना काल में आमजन को सस्ता एवं पोष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर हर्ष जताया है।

    नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा ने बताया कि इन्दिरा रसोई योजनान्तर्गत राजसमन्द जिले में कुल 6 स्थायी रसोइयां स्थापित की गई है जिनमे अब तक 1,38,128 लाभार्थियों को भोजन खिलाया गया है। उक्त योजनान्तर्गत नगर परिषद् राजसमन्द क्षेत्र में 3 स्थानों पर रसोई संचालित की गई है तथा आमेट, देवगढ़, नाथद्वारा में एक-एक जगह इन्दिरा रसोई संचालित की गई है, जहाँ लाभार्थी 8 रू. में बैठकर भोजन कर सकता है। भोजन में मुख्यतः दाल, सब्जी, आचार व चपाती हैद्य नगर परिषद् व नगर पालिका क्षेत्रों में प्रतिदिन भोजन सीमा 300 थाली है व आवश्यकता होने इसे 100 प्रतिशत बढाया जा सकता है। जिले में प्रतिदिन की भोजन क्षमता 1800 है।

    जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समन्वय एवं मोनिटरिंग समिति का गठन किया गया है। जिला स्तरीय समिति द्वारा इन्दिरा रसोई संचालन के लिये क्षेत्रीय प्रतिष्ठित एन.जी.ओ. का चयन किया गया है, इन्हीं एन.जी.ओ. के मार्फत “ना लाभ ना हानि” के आधार पर रसोइयों का संचालन किया जा रहा है। रसोई संचालक (एन.जी.ओ.) को प्रति थाली 20 रु. प्राप्त होते है, इनमें से 8 रु. लाभार्थी से व 12 रु. राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त होता है।

रसोई हेतु आधारभूत एवं आवर्ती व्यय

    रसोई संचालन के लिये राज्य सरकार द्वारा ने केवल राजकीय भवन उपलब्ध कराये गए है, वरन रसोई संचालन हेतु प्रत्येक रसोई में आधारभूत व्यय के पेटे 5 लाख रु. व्यय कर फर्नीचर, बर्तन, फ्रिज, वाटर कूलर, आटा गुदने कि मशीन, वाटर प्यूरीफायर, कम्प्यूटर, गैस, बिजली, पानी कनेक्शन, इन्टरनेट कनेक्शन इत्यादि उपलब्ध कराये गए है।

    इतना ही नहीं, सरकार द्वारा प्रति रसोई प्रतिवर्ष आवर्ती व्यय के पेटे 3 लाख रु. उपलब्ध कराये गये है, जिनमे से कम्प्यूटर ऑपरेटर, बिजली पानी, इन्टरनेट आदि पर होने वाला व्यय सरकार वहन करती हैद्य साथ ही इसी व्यय से रसोई में कार्य करने वाले स्टाफ की ड्रेस, बर्तन, फर्नीचर के खराब होने पर नया लेने का भी प्रावधान है।

रसोइयों में सूचना एवं प्रोधोगिकी का व्यापक प्रयोग

    इन्दिरा रसोइयों में आईटी का बेहतर ढंग से उपयोग किया गया हैद्य लाभार्थी के रसोई में प्रवेश करते ही उसका स्वतरू ही फोटो खिंच जाता है एवं उसका नाम एवं मोबाईल नम्बर कम्प्यूटर में फीड कर वेब पोर्टल पर अपलोड किया जाता हैद्य इसके पश्चात लाभार्थी को तुरन्त मोबाईल पर मैसेज आता है कि इन्दिरा रसोई में पधारकर भोजन ग्रहण करने के लिये आपका धन्यवादद्य इस मैसेज में मोबाईल पर कोविड गाईडलाइन का पालना करने का भी आग्रह किया जाता है।

    वेब पोर्टल पर लाभार्थी एवं समस्त 6 रसोइयों का डाटा पब्लिक डोमेन में रहता है जिसे कोई भी व्यक्ति लाइव देख सकता हैद्य वेब पोर्टल एवं वेबसाइट पर लाभार्थियों कि संख्या, पुरुष, महिला, आयुवार लाईव काउन्टर रहता है, जिसमें पल-पल कि सूचना प्रदर्शित होती रहती हैै।

    लाभार्थियों को स्वायत शासन विभाग के कॉल सेन्टर एवं सूचना प्रोधोगिकी विभाग के राज्य स्तरीय कॉल सेन्टर से फोन कर भोजन कि गुणवता आदि के बारे में सुझाव लिया जाता है।

रसोई संचालको को ऑनलाईन भुगतान

    रसोई संचालको को देय राजकीय अनुदान के मासिक भुगतान कि विशेष व्यवस्था की हैद्य रसोई संचालको द्वारा पोर्टल पर सिंगल क्लिक से ऑनलाईन बिल जनरेट किया जाता है एवं यूआईडी पोर्टल के माध्यम से आधार आँथेन्टिकेट किया जाता है और बिल को अनलाईन ही बिना भौतिक हस्ताक्षर किये ऑनलाईन सॉफ्ट कॉपी में सम्बन्धित नगरीय निकाय को भुगतान के लिये भेज दिया जाता है। नगरीय निकाय में सम्बन्धित रसोई संचालक को भुगतान के लिये नोटशीट भी ऑनलाईन तैयार हो जाती है। इसके पश्चात सम्बन्धित नगरीय निकाय द्वारा रसोई संचालक को ऑनलाईन सीधे बैंक खाते में भुगतान हस्तांतरित हो जाता है।

    इस पूरी प्रक्रिया में समस्त थालियों कि गणना ऑनलाईन स्वतरू होकर इनवॉइस जनरेट होता है, रसोई संचालक को कहीं भी हस्ताक्षर नहीं करने पड़ते और ना ही बिल लेकर नगर निकाय में जाना पड़ता हैद्य भुगतान प्रक्रिया पूर्णतरू पारदर्शी है।

रसोइयों में जन सहभागिता

    इन्दिरा रसोई में कोई भी व्यक्ति एक या एक से अधिक समय का खाना प्रायोजित कर लाभार्थियों को मुफ्त में खाना खिला सकता है इसके लिये उसे किसी भी इन्दिरा रसोई में जाकर पैसा जमा कराना होता है, सम्बधित व्यक्ति के पास मोबाईल एवं ईमेल पर मैसेज आता है एवं प्रायोजित दिन के भोजन के समय प्रत्येक कूपन पर यह यह मैसेज लिखा आता है कि “आज का खाना श्री..... द्वारा प्रायोजित हैद्य प्रायोजक व्यक्ति को स्थानीय निकाय विभाग का प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता हैद्य राजसमन्द जिले में अब तक नगर परिषद् एवं नगर पालिकाओं में 10 व्यक्तियों द्वारा भोजन प्रायोजित किया जा चुका है।

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